गरीबों के दिलों पे राज करना है तो उनके दर्द को अपनाना पड़ता है

दलितों के दिलों पे राज करना है तो उनके दर्द को अपनाना पड़ता है और ये बात सिर्फ दलितों की नहीं हर उस गरीब की है जो उम्मीदों से अपने नेता को चुनता है की वो उनके हक़ की लड़ाई लड़ेगा 

बसपा के संस्थापक कांशीराम ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में 1980 के दशक में मायावती को उतारा. उसके बाद से प्रदेश के दलित समाज पर मायावती ने एकछत्र राज किया है.
मायावती की राजनीति पर उसी समय से रिपोर्टिंग कर रहीं पत्रकार रचना सरन के मुताबिक़ दलित समुदाय का मायावती के प्रति राजनीतिक नहीं, बल्कि भावनात्मक लगाव है.
उन्होंने बताया, अगर हेमा मालिनी की रैली में लोग उन्हें देखने आते हैं तो समझ में आता है. लेकिन आप मायावती की रैलियों में जब उनका हेलीकॉप्टर उतर रहा होता है तब उसके पीछे उनका कैडर- युवा और बूढ़े- सब भाग रहे होते हैं. सब उन्हें छूना, देखना और सुनना चाहते हैं. इनकी हेमा मालिनी तो मायावती ही हैं. चार बार मुख्यमंत्री रह चुकीं मायावती ने राजनीति के बीच अपने दलित वोट बैंक को बहुत कुशलता से सींचा है.

लेकिन सवाल हमेशा उठते रहे हैं कि प्रदेश में दलितों की एकमात्र ‘मसीहा’ कही जाने वाली मायावती के चलते दलितों का संपूर्ण सशक्तिकरण हो भी सका है या नहीं.
इस सवाल के जवाब की तलाश में मैं सबसे पहले मायावती के लोकसभा चुनाव क्षेत्र आंबेडकर नगर पहुंचा. पहले अकबरपुर के नाम से लोकप्रिय इस छोटे से शहर को ज़िले में तब्दील करने का कुछ श्रेय मायावती को भी जाता है.

यहाँ पर बड़े अस्पताल, कॉलेज और दलित वर्ग और पिछड़ी जातियों के लिए बड़ी आवासीय योजनाओं के पीछे भी मायावती का ही हाथ है. ज़िले की दलित बस्तियों में मायावती को पूजा जाता है. लोग कहते हैं कि इनकी वजह से समुदाय का डर ख़त्म हो चुका है. वे अब अपनी बात खुल कर रखते हैं. तमाम दलित बस्तियों में इस बात को लेकर नाराज़गी भी है कि जैसे ही कोई दूसरी सरकार आती है सभी कल्याणकारी योजनाएं ठप पड़ जाती हैं, सरकारी नौकरियों में दलितों की पूछ कम हो जाती है

मायावती के एक क़रीबी ने कहा, “मीडिया ने कभी सोनिया गांधी और स्मृति ईरानी से पूछा है क्या कि वे हीरे और सोना पहनतीं है कि नहीं? अगर नहीं तो फिर मायावती पर इस तरह के सवाल क्यों उठते हैं बसपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य कहते हैं, हमारा कैडर बहनजी के लिए जान छिड़कता है. बस इतना ही कहना है मुझे.

 

आने वाले समय में लोगो का भगवान पे विश्वास करना बंद हो जाएगा

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2 thoughts on “गरीबों के दिलों पे राज करना है तो उनके दर्द को अपनाना पड़ता है

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