शराब से प्रतिदिन 96वें मिनट पर एक भारतीय की मौत होती है

शराब से प्रतिदिन 96वें मिनट पर एक भारतीय की मौत होती है 2013 के राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों (सबसे ताज़ा आंकड़े उपलब्ध) पर इंडियास्पेंड द्वारा किए विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में शराब से प्रतिदिन 15 लोग या हरेक 96वें मिनट पर एक भारतीय की मौत होती है।

भारत में, प्रति व्यक्ति शराब की खपत में 38 फीसदी की वृद्धि हुई है, 2003-05 में 1.6 लीटर से 2010-12 में 2.2 लीटर हुआ है। यह आंकड़े विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट में सामने आए हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 11 फीसदी से अधिक भारतीय शराब के प्रभाव में आए हैं। इस संबंध में वैश्विक औसत 16 फीसदी है।

यह आंकड़े शराब के खिलाफ व्यापक राजनीतिक समर्थन होने की ओर इशारा करती है, हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि शराब एक स्वास्थ्य संबंधित समस्या है, न कि नैतिक समस्या है।

तमिलनाडु में जे जयललिता ने 23 मई, मुख्यमंत्री के रूप में अपने चौथे कार्यकाल के पहले दिन ही 500 शराब की दुकानों को बंद कर दिया है। अप्रैल में, बिहार में शराब की उत्पादन, बिक्री और खपत पर रोक लगाई गई है। अगस्त 2014 में, केरल के पांच सितारा होटल में शराब की बिक्री प्रतिबंधित की गई है।

केरल और तमिलनाडु में चुनाव पूर्व किए गए सर्वेक्षण में, इस रोक के प्रति व्यापक रुप से समर्थन देखा गया है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, केरल में 47 फीसदी और तमिलनाडु में 52 फीसदी पुरुष एवं महिलाओं ने इस रोक का समर्थन किया है। उत्तरदाताओं ने कहा कि, शराब पर रोक का सबसे महत्वपूर्ण कारण शराब शह घरेलू हिंसा थी।

शराब पर हाल ही में हुई कानूनी कार्यवाही से पहले, गुजरात और नागालैंड ही केवल भारतीय राज्य थे जहां शराब पर रोक लगाई गई थी।

शराब संबंधित मौत में महाराष्ट्र पहले स्थान पर

एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, शराब संबंधित होने वाले मौतों में सबसे पहला स्थान महाराष्ट्र का है। इसी संबंध में मध्यप्रदेश और तमिलनाडु का स्थान दूसरे एवं तीसरे नंबर पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि शराब की उच्च दर का सहसंबंध उच्च अपराध दर से है।

बीबीसी से बात करते हुए तमिलनाडु के मक्कल अधिकरम के एस राजू ने बताया कि, “बड़े अपराधों एवं दुर्घटनाओं का कारण शराब होती है और यह महिलाओं के यौन उत्पीड़न एवं बड़ी डकैतियों के लिए ज़िम्मेदार होते हैं। तमिलनाडु में 30 वर्ष से कम उम्र में सबसे अधिक विधवाओं की संख्या होने का कारण भी शराब का सेवन है।”

द इकोनोमिस्ट में, अकोहल एंड ड्रग इंफॉर्मेशन सेंटर, एक गैर सरकारी संगठन, की उद्धृत रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल दाखिले का एक चौथाई और केरल में सभी अपराधों के 69 फसीदी घटनाओं के लिए नशा ज़िम्मेदार है।

2014 में, ज़हरीली शराब पीने से रोज़ाना पांच मौतें

2015 में, मालवानी, मुबंई में अवैध शराब के सेवन से 100 से अधिक लोगों की जान गई थी। इस घटना से इलाके में भारी आक्रोश फूटा था। 2014 में, नकली / अवैध शराब के सेवन से कम से कम 1,699 लोगों की मौत हुई 2013 में यह आंकड़ा 387 था यानि कि 339 फीसदी की वृद्धि हुई है।

विक्रम पटेल, लंदन स्कूल ऑफ हाइजिन एवं ट्रॉपिकल मेडिसिन के साथ एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, इंडियन एक्सप्रेस के एक कॉलम में कहते हैं कि, शराब पररोक लगाने से लत और मौतों को कम नहीं कर सकते हैं।

पटेल लिखते हैं, “ऐसे पदार्थ जिसके सेवन से लोगों को खुशी मिलती है उस पर रोक लगाने से काम नहीं बनाता है। लत एक स्वास्थ्य संबंधित समस्या है, न कि नैतिक समस्या है। रोक लगाना ज्यादातर सार्वजनिक स्वास्थ्य वैज्ञानिकों द्वारा अस्वीकार किया गया है, जो इस क्षेत्र को भली प्रकार जानते हैं; यहां तक कि विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इसकी सिफारिश नहीं करता है।”

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