भारत में 5.50 करोड़ बुज़ुर्ग रोज़ाना रात को भूखे पेट सोते हैं

भारत में 5.50 करोड़ बुज़ुर्ग रोज़ाना रात को भूखे पेट सोते हैं गैर सरकारी संस्था Help Age India ने पिछले वर्ष देश के 10 शहरों में एक सर्वे किया था जिसके मुताबिक 73 फीसदी युवाओं ने माना था कि बुज़ुर्ग लोगों पर अत्याचार होता है। यूएनपीएफ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, करीब साढ़े पांच करोड़ बुज़ुर्ग लोग रोज़ाना रात को भूखे पेट सोते हैं।

भारत में 23 फीसदी बुज़ुर्ग घरेलू अत्याचार के शिकार हैं।

बुज़ुर्गों को सताने के मामले में बहुएं सबसे ऊपर हैं सर्वे में 39 फीसदी बुज़ुर्गों ने बहू द्वारा अत्याचार किए जाने की बात कही थी  बुज़ुर्गों को सताने के मामले में बेटे भी पीछे नहीं हैं 38 फीसदी मामलों में बेटों को बुज़ुर्ग मां-बाप पर अत्याचार का दोषी पाया गया था। चौंकाने वाली बात ये है कि महानगरों में 17 फीसदी बेटियां अपने मां-बाप पर ज़ुल्म ढा रही हैं।

अत्याचार का शिकार होने वाले बुजुर्गों में 35 फीसदी ऐसे हैं, जिन्हें लगभग रोज़ परिवारवालों की पिटाई का शिकार होना पड़ता है।अत्याचार का शिकार होने वाले 79 फीसदी बुजुर्गों के मुताबिक, उन्हें लगातार अपमानित किया जाता है।

76 फीसदी बुजुर्गों को अकसर बिना बात के गालियां और अभद्र भाषा सुनने को मिलती हैं। और सर्वे में शामिल 69 फीसदी बुजुर्गों का कहना था, कि उनकी अनदेखी की जाती है और उनकी ज़रूरतों पर ध्यान नहीं दिया जाता।

सर्वे में जो सबसे ज्यादा चिंताजनक बात सामने आई थी, वो ये है कि दिल्ली जैसे शहरों मे 92 फीसदी युवा अपने आसपास बुज़ुर्गों के साथ हो रहे बुरे व्यवहार के खिलाफ कभी आवाज़ नहीं उठाते United Nations Population Fund की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 60 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों की संख्या 10 करोड़ से ज्यादा है जिनमें से 75 फीसदी ग्रामीण भारत में रहते हैं।

देश के करीब एक तिहाई बुज़ुर्ग गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर करते हैं भारत के 90 फीसदी बुज़ुर्ग लोगों को सम्मानपूर्वक ज़िंदगी जीने के लिए सारी उम्र काम करना पड़ता है।

करीब साढ़े पांच करोड़ बुज़ुर्ग रोज़ाना रात को भूखे पेट सोते हैं हर 8 में से एक बुज़ुर्ग को लगता है कि उनके होने या ना होने से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता भारत में 1 करोड़ 20 लाख लोग दृष्टिहीन हैं, जिनमें से करीब 80 फीसदी बुज़ुर्ग हैं..इनमें से करीब 63 फीसदी बुज़ुर्ग मोतियाबिंद की वजह से नहीं देख पाते।

80 वर्ष से ज्यादा उम्र के एक तिहाई बुज़ुर्ग आर्थिक तौर से पूरी तरह दूसरों पर निर्भर हैं।

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