जानिए प्राणायाम के वैज्ञानिक रहस्‍य और स्‍वास्‍थ्‍य लाभ

धर्म और रिवाज़ हों या सदियों पुरानी योग क्रियाएं, कहीं न कहीं इस सबके साथ विज्ञान जुड़ा ही होता है। योग के अभिन्न अंग प्रणायाम पर भी ये बात लागू होती है। प्राणायाम करने के साथ भी विज्ञान जुड़ा हुआ है। तो चलिये आज आपको प्राणायाम के पीछे छिपे वैज्ञानिक रहस्‍य के बारे में जानकारी देते हैं।
श्वसन तंत्र का खाका

फेफड़े को लाभ:  प्राणायाम करने के कई स्‍वास्‍थ्‍य लाभ होते है। इसका सबसे बड़ा स्‍वास्‍थ्‍य लाभ यह होता है कि इसे करने से फेफडों को आराम मिलता है। यह उन लोगों के लिए सबसे लाभदायक होता है जिन्‍हे अस्‍थमा या सांस सम्‍बंधी समस्‍या होती है।

दरअसल हमारा श्वसन तंत्र नासिका से शुरू होता है, और वायुकोषों तक फैला हुआ होता है। जब हम नाक से सांस लेते हैं तो ये स्वर यंत्र और ग्रसनी (फैरिंक्स) से होते हुए श्वास नली (ट्रैकिया) में पहुंचती है। और फिर गर्दन के नीचे छाती में यह पहले दाएं-बाएं दो भागों में बंटती है और फिर पेड़ की शाखाओं-प्रशाखाओं की तरहपंद्रह से भी अधिक बार विभाजित होते हुए श्वसन वृक्ष बनाती है। यहां तक का श्वसन वृक्ष वायु संवाहक क्षेत्र (एयर कंडक्टिंग ज़ोन) कहलाता है। इसकी अंतिम शाखा जो कि टर्मिनल ब्रांकिओल कहलाता है, वो भी 5 से 6 बार विभाजित होती है और उसकी अंतिम शाखा पंद्रह से बीस वायुकोषों में खुलती है। वायुकोष कुछ अंगूर के गुच्छों के जैसा दिखाई पड़ता है। टर्मिनल ब्रांकिओल से वायुकोषों तक का हिस्सा श्वसन क्रिया को पूर्ण करने में अपनी प्रमुख भूमिका अदा करता है। इसे श्वसन क्षेत्र (रेस्पिरेटरी ज़ोन) कहा जाता है।

श्वास नली के इस वृक्ष की सभी शाखाओं-प्रशाखाओं के साथ रक्त को लाने और ले जाने वाली रक्त वाहिनियां भी होती हैं। पल्मोनरी धमनी हृदय से अशुद्ध रक्त को फेफड़े तक लाती है और वायुकोषों में शुद्ध हुआ रक्त छोटी शिराओं से पल्मेरनरी शिरा के माध्यम से दोबारा हृदय तक पहुंच जाता है। सामान्य श्वसन क्रिया (टाइटल रेस्पिरेशन) में फेफड़े के केवल 20 प्रतिशत भाग को ही कम करना पड़ता है। बाकी बचे भाग तो निष्‍क्रिय से ही रहते हैं और नैसर्गिक रूप से इस निष्क्रिय से हिस्सों में रक्त का प्रवाह भी बेहद धीमा होता है। अगर कोई व्यक्ति रोज़ाना व्यायाम न करें, तो वायुकोषों को पर्याप्त ताजी हवा और बेहतर रक्त प्रवाह से नहीं मिल पाता है। यही कारण है कि जब हम सीढ़ियां या छोटा पहाड़ चढ़ते हैं या दौड़ते हैं, तो सांस बुरी तरह से फूलने लगती है। ऐसा इसलिये, क्योंकि आलसी पड़े करोड़ों वायुकोष काम नहीं कर पाते हैं।
प्रणायाम करने पर क्या होता है?

जब हम प्राणायाम करते हैं, तो डायफ्राम सात सेंटीमिटर तक नीचे जाता है, पसलियों की मांसपेशियां भी अधिक सक्रीय होती हैं और ज्यादा काम करती हैं। इस प्रकार फेफड़े में ज्यादा हवा घुस पाती है और 100 प्रतिशत वायुकोषों को भरपूर ताजी हवा मिलती है। साथ ही रक्त प्रवाह भी बढ़ जाता है। इसी तरह दोनों फेफड़ों के बीच बैठा हृदय सब तरफ से दबाया जाता है, परिणाम स्वरूप इसको भी ज्यादा काम करना ही पड़ता है। रक्त के इस तेज प्रवाह के चलते वे कोशिकाएं भी पर्याप्त रक्तसंचार, प्राणवायु और पौष्टिक तत्व से भर जाती हैं, जिन्हें सामान्य स्थिति में बेकार रहना पड़ रहा था।

प्रणायाम करने से फैफड़ों सहित पेट के सभी अंगों के क्रियाकलाप सम्यक रूप से होने लगते हैं। ग्रंथियों से रसायन समुचित मात्रा में निकलते हैं, विजातीय पदार्थ बाहर हो जाते हैं, तेज प्रवाह से बैक्टीरिया लाचार पड़ जाते हैं, पर्याप्त भोजन प्राणवायु मिलने से कोशिकाओं की रोगों से लड़ने की ताकत बढ़ जाती है, बोन मेरो में नए रक्त का निर्माण होता है। आंतों में जमा मल बाहर होने लगता है। खाया-पीया शरीर को लगने लगता है, परिणाम स्वरूप स्मरण शक्ति, सोचने-समझने और विश्लेषण की शक्ति बढ़ती है। धैर्य और विवेकशीलता में वृद्धि होती है। कुल मिलाकर कहा जाए तो, आयुर्वेद में स्वस्थ व्यक्ति की जो परिभाषा दी है, वह जीवन में साकार हो जाती है, ‘प्रसन्नत्मेन्द्रियमना स्वस्थ्य इत्यभिधयते’ अर्थात शरीर, इन्द्रियां, मन तथा आत्मा की प्रसन्नतापूर्ण स्थिति ही स्वास्थ्य है।

वजन कम होता है :  प्राणायाम करने से बाहर निकला हुआ पेट अंदर हो जाता है और वजन घटाने में आराम मिलता है। अगर आप इसे नियमित रूप से करें तो आपको अपने वजन में फर्क अवश्‍य महसूस होगा।

ह्दय स्‍वास्‍थ्‍य में सुधार:  प्राणायाम जैसे – अनुलोम विलोम और भास्त्रिका आदि करने से ह्दय सम्‍बंधी समस्‍याओं में लाभ मिलता है और दिल अच्‍छी तरह कार्य करता है। इससे शरीर में ब्‍लड़ सर्कुलेशन भी अच्‍छी तरह होता है और शरीर में ब्‍लड़ के माध्‍यम से ऑक्‍सीजन भरपूर मात्रा में मिलती है

मानसिक एकाग्रता में सुधार:  मानसिक एकाग्रता सुधारने के लिए, प्राणायाम सबसे अच्‍छा तरीका है। इसे करने से दिमाग तेज होता है, दिमागी एकाग्रता बढ़ाने के लिए प्राणायाम करना बेहतर होता है।

डिप्रेशन और तनाव में आराम:  प्राणायाम करने से मानसिक रूप से दृढता आती है और व्‍यक्ति को डिप्रेशन की अवस्‍था से बाहर निकलने में आराम मिलता है। नियमित रूप से प्राणायाम करने से डिप्रेशन और तनाव में आराम मिलता है। आप पढ़ाई करने के बाद हुई थकान को भी प्राणायाम से दूर भगा सकते है।

नाक साफ रहती है जि‍न लोगों को हर समय सर्दी और जुकाम की समस्‍या रहती है और उनकी नाक बहती रहती है, ऐसे ग्रसित लोगों को प्राणायाम अवश्‍य करना चाहिए, इससे उनकी नाक के रास्‍ते साफ रहते है और जुकाम आदि में भी आराम मिलता है।

2,088 total views, 2 views today

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *