हर कोई अनजान है इस औषधि गुंजा के फायदों से

गुंजा एक औषधीय पौधा है। यह एक लता जाति की वनस्पति है। इसकी पत्तियां इमली के पत्तों जैसी होती है और पुष्प गुच्छे में गुलाबी रंग के होते है। यह पुष्प सेम की ही तरह ही दिखते हैं। लता में सर्दियों में पुष्प आते है। इसकी शिम्बी छोटी होती है जिसके अन्दर बीज होते है। इसकी दो प्रजातियाँ उपलब्ध हैं, सफ़ेद बीज और लाल/रक्त बीज वाली। आयुर्वेद में श्वेत गुंजा के पर्याय उच्चटा और कृष्णला हैं जबकि रक्त गुंजा को काकचिंची, काकणन्ती, रक्तिका, ककाद्नी, काकपीलू, काकवल्लरी हैं। हिंदी में गुंचा को घुंघुची, चौंटली, चिरमिटी, और रत्ती के नाम से जाना जाता है। प्राचीन समय में इसी के बीजों को आयुर्वेद की दवा और आभूषण बनाने में माप की तरह प्रयोग किया जाता था जो की रत्ती कहलाता था। रत्ती के १०० बीजों का वज़न करीब १२ ग्राम होता है।

आयुर्वेद में दोनों ही प्रकार की रत्ती या गुंजा को बालों के लिए हितकारी, बलदायक, और वात, पित्त, ज्वर, मुखशोष, भ्रम, श्वास, अधिक प्यास, त्वचा रोगों, गंजापन, और कोढ़ को नष्ट करने वाला माना गया है।

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